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Palace in Jaipur

Hawa Mahal

State Protected Monument

This is a photo of ASI monument number
This is a photo of ASI monument numberShahriar Amin Fahim247 · CC BY-SA 4.0

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The story of Hawa Mahal

हवा महल, जयपुर के सिटी पैलेस का हिस्सा, एक पाँच-मंज़िला महल है जिसकी सबसे पहचानी जाने वाली चीज़ इसका छत्ते जैसा अग्रभाग है। सड़क की तरफ़ से इसे देखिए तो 953 छोटी-छोटी झरोखों वाली जालीदार दीवार नज़र आती है, और ऊपर की तीन मंज़िलें तो एक ही कमरे जितनी चौड़ाई की हैं।

इसे 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था, और वास्तुकार लाल चंद उस्ताद ने इसे राजमुकुट के आकार जैसा रूप दिया। यहाँ का नाम भी इसी विचार से जुड़ता है: Hawa Mahal का अर्थ सीधे “wind palace” है। यह चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है, और इसके सामने का रूप मधुमक्खी के छत्ते जैसा दिखाई देता है। आप सामने से जो नाज़ुक जालीदार काम देख रहे हैं, वह सिर्फ़ सजावट नहीं है; इसके पीछे का उद्देश्य राजघराने की महिलाओं को पर्दा प्रथा का पालन करते हुए नीचे सड़क की गतिविधियाँ देखने देना था।

इस इमारत को भगवान श्री कृष्ण और राधा को समर्पित बताया गया है। भीतर के हिस्सों में स्तंभों और गलियारों वाली कक्षाएँ हैं, और यह व्यवस्था ऊपर तक जाती है। यह महल राज्य संरक्षित स्मारक भी है, इसलिए इसका संरक्षण औपचारिक रूप से दर्ज है।

अगर आप यहाँ खड़े होकर ध्यान से देखें, तो सबसे पहले सामने की पूरी सतह में दोहराव वाला जालीदार पैटर्न दिखेगा, फिर ऊपर की पतली बनावट, और उसके नीचे सिटी पैलेस का हिस्सा होने वाली इसकी स्थिति समझ आएगी। इसके ठीक पास Badi Chaupar है, जो इस जगह को शहर के मुख्य मार्ग पर रखता है।

In brief

हवा महल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1799 में राजस्थान जयपुर बड़ी चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है

महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी 'राजमुकुट' की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ताद द्वारा डिजाइन किया गया था।भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार जैसा प्रतीत होता है इसकी अद्वितीय पाँच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें 953 बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं।] इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े "पर्दा प्रथा" का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें।[ इसके अतिरिक्त, "वेंचुरी प्रभाव" के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठण्डी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है।]

चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है।

यह पाँच मंजिला इमारत है

5.हवा महल (सबसे ऊपर वाली मंजिल)

4. प्रकाश मंदिर

3. विचित्र मंदिर

2. रतन मंदिर

1. शरद/प्रताप मंदिर (पहली मंजिल)

यह भवन भगवान श्री कृष्ण एवम् राधा को समर्पित हैं|

Key facts

Named after
wind
Built
1799
Opened
1799
Commissioned by
Sawai Pratap Singh
Architect
Lal Chand Ustad
Architectural style
Mughal architecture
Floors
5

Before you go

Best months
September to March

Where this comes from