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Palace in Jaipur

हवा महल

State Protected Monument

picture of hawa mahal in rajasthan
picture of hawa mahal in rajasthanNihalkonan · CC BY-SA 4.0

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The story of हवा महल

हवा महल एक राजसी-महल है, जो जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर खड़ा है। इसकी सबसे पहचानने लायक बात सामने से दिखने वाली उसकी मधुमक्खी-छत्ते जैसी जालीदार मुखाकृति है, जिसमें 953 छोटी-छोटी झरोखियाँ हैं।

इसे 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था, और इसका डिज़ाइन लाल चंद उस्ताद ने किया था। यह पाँच-मंजिला इमारत ऊपर से बहुत संकरी दिखती है; इसकी ऊपरी तीन मंजिलों की चौड़ाई एक कमरे जितनी है, जबकि पहली और दूसरी मंजिलों के सामने आँगन हैं। सामने से इसका रूप छोटे-छोटे छिद्रों, नक्काशीदार बलुआ-पत्थर की जालियों, फिनियल्स और गुंबदों का एक घना संयोजन लगता है।

यह महल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है। इसके पीछे की ओर स्तंभों और गलियारों वाले कक्ष हैं, जिनमें अलंकरण बहुत कम है, और ये ऊपर की मंजिल तक जाते हैं। इस संरचना का पूरा उद्देश्य राजघराने की महिलाओं को, पर्दा प्रथा का पालन करते हुए, नीचे सड़क पर होने वाले समारोहों और रोज़मर्रा की गतिविधियों को बिना देखी गई देख सकें। इसी जटिल जालीदार बनावट की वजह से भीतर हवा का प्रवाह बना रहता है।

यह भवन सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष तक फैला हुआ है। इसका संबंध भगवान कृष्ण और राधा से भी जोड़ा जाता है, और इसे भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार जैसा बताया गया है।

आज यह एक State Protected Monument है। अगर आप इसे देखते हुए खड़े हैं, तो ऊपर की संकरी मंजिलों और सामने की पूरी जालीदार दीवार पर ध्यान दीजिए; यही इस महल की सबसे अनोखी पहचान है। सुबह की रोशनी में इसका मुखौटा खास तौर पर अलग दिखाई देता है।

In brief

हवा महल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1799 में राजस्थान जयपुर बड़ी चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है

महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी 'राजमुकुट' की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ताद द्वारा डिजाइन किया गया था।भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार जैसा प्रतीत होता है इसकी अद्वितीय पाँच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें 953 बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं।] इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े "पर्दा प्रथा" का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें।[ इसके अतिरिक्त, "वेंचुरी प्रभाव" के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठण्डी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है।]

चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है।

यह पाँच मंजिला इमारत है

5.हवा महल (सबसे ऊपर वाली मंजिल)

4. प्रकाश मंदिर

3. विचित्र मंदिर

2. रतन मंदिर

1. शरद/प्रताप मंदिर (पहली मंजिल)

यह भवन भगवान श्री कृष्ण एवम् राधा को समर्पित हैं|

Key facts

Named after
wind
Built
1799
Opened
1799
Commissioned by
Sawai Pratap Singh
Architect
Lal Chand Ustad
Architectural style
Mughal architecture
Floors
5

Before you go

Open today
9:00 AM – 7:00 PM
Time to allow
1.5-2.5 hr
Best months
September to March
Address
Hawa Mahal Rd, Badi Choupad, J.D.A. Market, Kanwar Nagar, Jaipur, Rajasthan 302002, India

Where this comes from